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50+ Ghalib Shayari | Mirza Ghalib Shayari In Hindi With Image

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Ghalib Shayari जैसा की आपने टाइटल देख लिया होगा होगा की आज हम किस विषय पर बात करने वाले हैं दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस नयी पोस्ट में आज हम ले के आये हैं 2021 का बिलकुल Mirza Ghalib Shayari का नया संग्रह। यह उर्दू शायरी के सर्वकालिक महान शायर माने जाते थे तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं Mirza Ghalib Shayari In Hindi

कितना ख़ौफ होता है शाम के अंधेरों में
पूछ उन परिंदों से जिनके घर नहीं होते।

ये हम जो हिज्र में दीवार-ओ-दर को देखते हैं

ये हम जो हिज्र में दीवार-ओ-दर को देखते हैं
कभी सबा को, कभी नामाबर को देखते हैं
वो आए घर में हमारे, खुदा की क़ुदरत हैं!
कभी हम उमको, कभी अपने घर को देखते हैं
नज़र लगे न कहीं उसके दस्त-ओ-बाज़ू को
ये लोग क्यूँ मेरे ज़ख़्मे जिगर को देखते हैं

Mirza Ghalib Shayari


तेरे ज़वाहिरे तर्फ़े कुल को क्या देखें
हम औजे तअले लाल-ओ-गुहर को देखते हैं.

हैं और भी दुनिया में सुख़नवर बहुत अच्छे
कहते हैं कि ग़ालिब का है अन्दाज़-ए बयां और

50+ Ghalib Shayari | Mirza Ghalib Shayari In Hindi With Image

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है।


रहा गर कोई ता क़यामत सलामत 
फिर इक रोज़ मरना है हज़रत सलामत। 

क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन।

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है।
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है।

दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई
दोनों को इक अदा में रज़ामंद कर गई।

50+ Ghalib Shayari | Mirza Ghalib Shayari In Hindi With Image

दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ।

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक 
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक।

Mirza Ghalib Shayari In Hindi


न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता।

आईना क्यूँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसे
ऐसा कहाँ से लाऊँ कि तुझ-सा कहें जिसे।

50+ Ghalib Shayari | Mirza Ghalib Shayari In Hindi With Image

"गा़लिब" बुरा न मान जो वाइज़ बुरा कहे
ऐसा भी कोई है कि सब अच्छा कहें जिसे।

हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
दिल को ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है।


क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हां
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन।

मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले।

कितना ख़ौफ होता है शाम के अंधेरों में
पूछ उन परिंदों से जिनके घर नहीं होते।

50+ Ghalib Shayari | Mirza Ghalib Shayari In Hindi With Image


Ghalib Shayari In Hindi


हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता 
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता। 

रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं।

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।


उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है।

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उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है।

काबा किस मुँह से जाओगे 'ग़ालिब'
शर्म तुम को मगर नहीं आती।

Shayari Of Ghalib


बना है शह का मुसाहिब, फिरे है इतराता
वगर्ना शहर में "ग़ालिब" की आबरू क्या है।

जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है।

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ये रश्क है कि वो होता है हमसुख़न हमसे
वरना ख़ौफ़-ए-बदामोज़ी-ए-अदू क्या है।

हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे
कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और।

न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता।

दर्द जब दिल में हो तो दवा कीजिए
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजिए।


हाथों की लकीरों पे मत जा ऐ गालिब 
नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते।

वाइज़!! तेरी दुआओं में असर हो तो मस्जिद को हिलाके देख 
नहीं तो दो घूंट पी और मस्जिद को हिलता देख। 

नज़र लगे न कहीं उसके दस्त-ओ-बाज़ू को
ये लोग क्यूँ मेरे ज़ख़्मे जिगर को देखते हैं।

रही न ताक़त-ए-गुफ़्तार और अगर हो भी
तो किस उम्मीद पे कहिये के आरज़ू क्या है।

पियूँ शराब अगर ख़ुम भी देख लूँ दो चार
ये शीशा-ओ-क़दह-ओ-कूज़ा-ओ-सुबू क्या है।

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है।

50+ Ghalib Shayari | Mirza Ghalib Shayari In Hindi With Image

चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन
हमारी ज़ेब को अब हाजत-ए-रफ़ू क्या है।

न शोले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदा
कोई बताओ कि वो शोखे-तुंदख़ू क्या है।

Shayari Ghalib For Whatsapp


हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है
वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता।


तेरे वादे पर जिये हम, तो यह जान, झूठ जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते, अगर एतबार होता।

दर्द हो दिल में तो दवा कीजे
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजे।

50+ Ghalib Shayari | Mirza Ghalib Shayari In Hindi With Image

आज फिर इस दिल में बेक़रारी है
सीना रोए ज़ख्म-ऐ-कारी है
फिर हुए नहीं गवाह-ऐ-इश्क़ तलब 
अश्क़-बारी का हुक्म ज़ारी है
बे-खुदा , बे-सबब नहीं , ग़ालिब
कुछ तो है जिससे पर्दादारी है।

दुःख दे कर सवाल करते हो
तुम भी ग़ालिब कमाल करते हो।

Ghalib Shayari On Love


सादगी पर उस के मर जाने की  हसरत दिल में है 

सादगी पर उस के मर जाने की  हसरत दिल में है 
बस नहीं चलता की फिर खंजर काफ-ऐ-क़ातिल में है 
देखना तक़रीर के लज़्ज़त की जो उसने कहा 
मैंने यह जाना की गोया यह भी मेरे दिल में है।

सबने पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास 

सबने पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास 
जिस कदर लोग थे बारिश में नहाने वाले 
अदल के तुम न हमे आस दिलाओ 
क़त्ल हो जाते हैं , ज़ंज़ीर हिलाने वाले।

हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन

हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
दिल को ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल
जब आंख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है


तुम न आए तो क्या सहर न हुई

तुम न आए तो क्या सहर न हुई
हां मगर चैन से बसर न हुई
मेरा नाला सुना ज़माने ने
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई

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Mirza Ghalib Shayari In Hindi 2 Line


अब कर के फ़रामोश तो नाशाद करोगे
पर हम जो न होंगे तो बहुत याद करोगे।

अपने तो होंठ भी न हिले उसके रू-ब-रू
रंजिश की वजह 'मीर' वो क्या बात हो गई।

दिल वो नगर नहीं कि फिर आबाद हो सके
पछताओगे सुनो हो ये बस्ती उजाड़कर।

हम को शायर न कहो 'मीर' कि साहब हम ने
दर्द-ओ-ग़म कितने किए जमा तो दीवान किया।

जिन जिन को था ये इश्क़ का आज़ार मर गए
अक्सर हमारे साथ के बीमार मर गए।

काबे जाने से नहीं कुछ शेख़ मुझको इतना शौक़
चाल वो बतला कि मैं दिल में किसी के घर करूँ।

कोई तुम सा भी काश तुम को मिले
मुद्दआ हम को इंतिक़ाम से है।

मैं रोऊँ तुम हँसो हो क्या जानो ‘मीर’ साहब
दिल आपका किसू से शायद लगा नहीं है।

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है।

सारे आलम पर हूँ मैं छाया हुआ
मुस्तनद है मेरा फ़रमाया हुआ। 

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तुझी पर कुछ ऐ बुत नहीं मुनहसिर
जिसे हम ने पूजा ख़ुदा कर दिया।


में आशा करता हूँ के आपको हमारा यह 2021 Mirza Ghalib Shayari का यह संग्रह अच्छा लगा हो दोस्तों अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो शेयर कीजिये और कमेंट में अपना प्यार दिखाये धन्यवाद।

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